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Monday, December 3, 2012

ज़िन्दगी के सफ़र में गिरते सभी हैं


ज़िन्दगी के सफ़र में
गिरते सभी हैं
ज़ख्म खाते भी सभी हैं
दर्द से करहाते भी सभी हैं
मुस्कराककर उठते वहीं हैं
जो मंजिल
तक पहुंचना चाहते
ज़ज्बा नहीं खोते
जो रोते रह जाते
वो रास्ते से भटक जाते
मंजिल का पता ही
भूल जाते हैं
889-08-03-12-2012
ज़िन्दगी,सफ़र,मंजिल ,ज़ज्बा

Thursday, September 27, 2012

छोटा सा काँटा


चलते चलते
ध्यान रखते रखते भी
पैर में चुभ गया
छोटा सा काँटा
चलना रुका नहीं
पर दर्द से हाल बेहाल
करने लगा
 छोटा सा काँटा
बैठ गया पेड़ तले
किसी तरह निकल जाए
छोटा सा काँटा
पैर लहुलुहान हो गया
निकलने का नाम ना लिया
जिद पर अड़ गया
छोटा सा काँटा
थक हार कर लंगडाते हुए
फिर चल पडा सफ़र पर
समझ गया ध्यान
कितना भी रख लो
चुभ सकता है
ज़िन्दगी के सफ़र में
छोटा सा काँटा
रुला सकता है
बिगाड़ सकता है
ज़िन्दगी की चाल
करता सकता हैरान
छोटा सा काँटा
कब चुभेगा
पता नहीं चलता
कर देगा जीना दूभर
छोटा सा काँटा
ज़िन्दगी का सफ़र
 बड़ा अजीब होता है
बता गया
छोटा सा काँटा
755-51-27-09-2012
ज़िन्दगी,सफ़र,कष्ट,तकलीफ,

Saturday, November 5, 2011

सफ़र को सुहाना कर दो


कुछ कदम
साथ चल लो
कुछ लम्हों का
सहारा दे दो 
अनचाहे ही सही
मुझे बर्दाश्त कर लो
कुछ वक़्त
मुस्काराने दो
ग़मों को सहने का
दम दे दो
निरंतर चलना तो
मुझको होगा
लड़ना भी
मुझको होगा
थोड़ा वक़्त के लिए
ही सही
सफ़र को सुहाना
कर दो  
03-11-2011
1742-11-11-11

Monday, September 5, 2011

देने को कुछ नहीं पास मेरे

कुछ नहीं पास मेरे
बांटने के लिए 
है सिर्फ प्यार
जिन्होंने दिया
मुझ को प्यार 
उन्हें भी प्यार
जो ना दे सके
रंज नहीं उनसे 
उन्हें भी प्यार
जो भी मिला
सफ़र में उसे
सलाम
जो ना मिल सका
उसे भी सलाम
जो मिलेगा
आगे सफ़र में
निरंतर रहेगा
उसका इंतज़ार
05-09-2011
    1449-21-09-11     

Wednesday, August 31, 2011

माँ थोड़ी दूर मेरे साथ चलो

थोड़ी दूर मेरे
साथ चलो
थोड़ी सी हिम्मत
दे दो
थोड़ा साहस
बढ़ा दो
थोड़ा सहारा
दे दो
चलने का तरीका
सिखा दो
ना थकने का
रास्ता बता दो
गड्डों से बचने की
विधि समझा दो
माँ थोड़ी दूर मेरे
साथ चलो
चलने का कारण
समझा दो
गिर कर फिर
उठ सकूँ
निरंतर चल सकूँ
वो ढंग बता दो
मुझे मंजिल का 
पता बता दो
माँ थोड़ी दूर मेरे
साथ चलो
31-08-2011
1422-144-08-11

Saturday, April 2, 2011

दोस्त ही दोस्त की बात समझता

किस्मत वालों को
अच्छा दोस्त मिलता
दोस्त 
चुना जा सकता
रिश्तेदार
सौगात में मिलता
नहीं भाये
तो भी ढोना पड़ता
उम्र और लिंग से
भेद ना होता  
सारे राज़ दिल में
जज्ब रखता
मुश्किल वक़्त में
साथ निभाता
सोच समझ कर
सलाह देता
बिना दोस्त
दोस्त का मन ना
लगता
मिले बिना दिन
व्यर्थ लगता
दोस्त ही  दोस्त की
बात समझता
निरंतर यकीन सिर्फ
दोस्त पर रखता
02-04--11
583—16 -04-11

साथी सफ़र के बदल गए ,मंजिल मगर बदली नहीं


साथी सफ़र के बदल गए
मंजिल मगर बदली नहीं
अरमान
मोहब्बत से जीने के बनाए
पूरे ना हुए
रास्ता मगर बदला नहीं
किश्ती
को किनारा ना मिला
मांझी मगर बदला नहीं
निरंतर
इबादत खुदा से करी,
हसरतें पूरी ना हुयी
खुदा मगर बदला नहीं 
  मोहब्बत मेरी फितरत थी
जवाब में नफरत मिली
फितरत मगर बदली नहीं
02-04--11
579—12 -04-11