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Wednesday, March 14, 2012

जितना हँस सकूँ,उतना हँस लूँ

अब थकने लगा हूँ
ज़िन्दगी से डरने लगा हूँ
क्या होगा
आने वाले बरसों में
डर से सहमने लगा हूँ
क्यों बूढा होता इंसान
निरंतर सोचता हूँ
क्यों लौटता नहीं बचपन
खुदा से पूछता हूँ
फिर खुद को संभालता हूँ
खुद से कहता हूँ
जो होना होगा हो
जाएगा
जब होगा देखा जाएगा
अभी से क्यूं
हाल को बेहाल करूँ
जितना
हँस सकूँ उतना हँस लूँ
ज़िन्दगी मस्ती में
गुजार लूँ
13-03-2012
366-100-03-12

Saturday, August 20, 2011

हास्य कविता-हँसमुखजी खुद कुंवारें थे , मगर हर विवाह में शामिल होते थे

खुद कुंवारें थे
मगर हर विवाह में
शामिल होते थे
एक विवाह समारोह में
बात-बेबात निरंतर
खुल कर हंस रहे थे
मैंने इस तरह हंसने का
कारण पूछा
उन्होंने जवाब दिया
लड़के का बाप भी
हँस रहा है
पत्नी के ज़ुल्मों से
पीड़ित है
अभी तक अकेले
रोता था
अब बेटे का साथ
मिलेगा
माँ हँस रही है
क्यों की
ज़ुल्म करने के लिए
पती और बहु दोनों होंगे
दुल्हे का आखिरी दिन है
हँसने का
कल से रोना पडेगा
इसलिए अंतिम बार
खुल कर हँस रहा है
दुल्हन को भी नखरे उठाने
ज़ुल्म ढाने के लिए पती
मिल गया है
बच्चे पैदा होंगे तो सास
सम्हालेगी
इसलिए हँस रही है
मैं इन सब को देख कर
हँस रहा हूँ
इनका परिवार बढेगा
बेटा,बेटी पैदा होंगे
उनके नखरे बर्दाश्त करेंगे
हर इच्छा पूरी करेंगे
सर पर चढ़ाएंगे,
फिर रोएंगे  
उनको भी शादी के
चक्कर में फंसाएंगे
वो भी दिखाने को हँसेंगे
असलियत में रोएंगे
मैंने शादी नहीं करी
हर बच्चे को अपना
समझता हूँ
सब को इकसार प्यार
करता हूँ
बच्चों का चहेता हूँ
 निरंतर खुल कर
हंसता हूँ
20-08-2011
1387-109-08-11
 (हास्य कविता)

Wednesday, August 17, 2011

ऐ ज़िन्दगी इतना ना झंझोड़ जीने का मतलब भूल जाऊँ

ऐ ज़िन्दगी
इतना ना झंझोड़
जीने का मतलब
भूल जाऊँ
ज़िन्दगी को
ग़मों का समंदर
समझ लूँ
हँसना भूल जाऊँ
निरंतर रोता रहूँ
अपना वजूद खो दूँ
गुमनामी

में चला जाऊँ

17-08-2011

1375-97-08-11

Sunday, August 14, 2011

हास्य कविता-बिरादरी के नंगे घूमने के रिवाज़ का तो ख्याल रखो

हंसमुखजी
एक दस साल के बच्चे को
कई दिनों से खुले आम
नंगा नाहते देखते थे
एक दिन उनसे
रहा नहीं गया
उन्हें क्रोध आ गया
सीधा बच्चे पर उतार दिया
गधे की औलाद हो
शर्म नहीं आती है
खुले आम नंगे नाहते हो
बच्चा शैतान और
हाज़िर जवाब था
उसे हंसमुखजी का
बर्ताव पसंद नहीं आया
उसने नहले पर दहला मारा
ताउजी मुझे पता नहीं था
आप भी हमारे परिवार के हैं
हंसमुखजी क्रोध से उफन गए
उछलते हुए बोले
क्या बकता है?
बच्चे ने दहले पर गुलाम मारा
कम से कम नस्ल का तो
ख्याल करो
बकता नहीं,रेंकता कहो
कपडे उतार कर आप भी नाहलो
बिरादरी के नंगे घूमने के
रिवाज़ का तो ख्याल रखो
14-08-2011
1360-82-08-11

Saturday, August 13, 2011

हास्य कविता-बीस साल की कन्या ने हँसमुखजी को बुड्ढा कह दिया

बीस साल की कन्या ने
हँसमुखजी को बुड्ढा
कह दिया
उनकी जवानी को
ललकार दिया
हँसमुखजी से बर्दाश्त
नहीं हुआ
उनका पारा चढ़ गया
बाहें चढाते हुए ,
पोपले मुंह से
लडकी को करारा
जवाब दिया
बुड्ढा होगा तेरा बाप
नादान लडकी तूं मुझे
पहचानती नहीं है
तेरे बाप के बाप को भी
मैंने स्कूल में पढ़ाया था
उसकी बरात में भी
गया था
निरंतर आधा पाँव दूध
रोज़ पीता हूँ
अपनी जवानी को
बरकरार रखता हूँ
फिर भी तूने मुझे
बुड्ढा कह दिया
13-08-2011
1358-80-08-11