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Wednesday, August 3, 2011

ऐ बहारों लौट कर आ जाओ

ऐ बहारों लौट कर
आ जाओ
चमन को फिर से
महका दो
वीराने को गुलों से
भर दो
मोहब्बत के रंगों से
सजा दो
निरंतर बह रही
नफरत की हवाओं का
रुख मोड़ दो
गीत भाईचारे के
सुना दो
दुश्मन को फिर से
दोस्त बना दो
जो बिछड़ गए

उन्हें

फिर से मिला दो
उदास चेहरों को
फिर से हँसा दो

02-08-2011

1290-12-08-11

Saturday, March 26, 2011

फूल जहां भी खिलता,हमेशा महकता



फूल 
जहां भी खिलता
हमेशा महकता
निरंतर दिल को लुभाता
दूर से ही अहसास
खुशबू का कराता
आनंद हर शख्श को देता
भेद भाव कभी ना करता
जात,पांत,रंग,मजहब से
दूर खुद को रखता
सन्देश भाई चारे को देता
हर इंसान को बराबर
समझता
जो भी प्यार से लगाए
उस के बगीचे में
खिलता
26-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
510—180-03-11

Friday, March 18, 2011

रिश्तों पर विराम लग गया,अहम् अब अहम् हो गया




 रिश्तों पर विराम
लग गया
अहम् अब अहम्
हो गया
कौन पहल करे
सवाल खडा हो गया
इक दूजे के जहन में
दिन रात सवार हो गया
दिलों में जहर भर गया 
निरंतर ध्यान दूजे का
रहता
किसे क्या कहाँ
मालूम करता रहता
मन किसी का चैन से
ना रहता
तिल का ताड़ बन गया
सहयोग दोनों का रहा
जो पहल करे
वो छोटा हो गया
इज्ज़त का सवाल
हो गया
अहम् जीत गया
भाई चारा हार गया
19-03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
448—117-03-11