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Sunday, March 18, 2012

ख्वाब मेरे सूरत उनकी थी

ख्वाब मेरे
सूरत उनकी थी
रोम रोम में आग
लगाते हुए
मदहोश करती हुयी
उनकी शोख अदाएं थी
तीर चलाते हुए उनकी
दिलकश निगाहें  थी
गले में
हार पहनाती उनकी
बाहें थी
होठों पर उनके होठों की
नमी थी 
मोहब्बत की आंधियां
दिल में उड़ रही थीं
अफ़सोस की सिर्फ
अहसास की रात थी
थोड़ी देर में सुबह होने
को थी
सब बातें सिर्फ ख़्वाब
की बातें थी
18-03-2012
399-133-03-12

Saturday, July 2, 2011

ज़माने से बेखबर तुम में डूबा हुआ था

ख़्वाबों का
सिलसिला टूट गया
तुम मुझे
मैं निरंतर तुम्हें
देख रहा था
 तुम्हारा हाथ 
मेरे हाथ में था
ज़माने से बेखबर
तुम में डूबा
हुआ था
बस इतना सा
याद रहा
02-07-2011
1126-10-07-11

Sunday, April 3, 2011

इशारे से बुलाया था

इशारे से बुलाया था
मुस्कान से लुभाया था
कानों में
कुछ बुदबुदाया था
हमने
इश्क का आगाज़ समझा
हम ख़्वाबों में खो गए
वो नज़रों से ओझल
हो गए
खुद महफ़िल से चले गए
साज़ दिल का छेड़ गए
बजने से पहले ही
तोड़ गए
ज़िन्दगी निरंतर,ग़मों से
भर गए
03-04--11
590—23 -04-11