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Saturday, July 30, 2011

मोहब्बत क्यों? कब? और कैसे होती है ?अब समझ आ गया

चेहरा खूबसूरत,

अंदाज़ निराला

रंग-रूप न्यारा

देखते ही

दिल को लुभाया

बातों ने मुझे उनका

बनाया

निरंतर पूंछा सबसे

कोई नहीं

समझा पाया

मोहब्बत क्यों?

कब?

और कैसे होती है?

अब समझ आ गया

30-07-2011

1266-150 -07-11

Sunday, April 3, 2011

यूँ ही नहीं मुस्कराता,कोई किसी को देख कर

यूँ ही नहीं मुस्कराता
कोई किसी को देख कर
कुछ तो देखा होगा
निरंतर मुझ में तुमने
सूरत नहीं तो दिल में
झांका होगा तुमने
दिल से दिल मिलाया होगा
मोहब्बत से लबालब उसे
पाया होगा
उसने ही तुम्हें लुभाया होगा
जी मुस्कराने का किया होगा
मुस्करा कर
पैगाम दिल का दिया होगा
03-04--11
591—24 -04-11

इशारे से बुलाया था

इशारे से बुलाया था
मुस्कान से लुभाया था
कानों में
कुछ बुदबुदाया था
हमने
इश्क का आगाज़ समझा
हम ख़्वाबों में खो गए
वो नज़रों से ओझल
हो गए
खुद महफ़िल से चले गए
साज़ दिल का छेड़ गए
बजने से पहले ही
तोड़ गए
ज़िन्दगी निरंतर,ग़मों से
भर गए
03-04--11
590—23 -04-11