Showing posts with label कामयाबी. Show all posts
Showing posts with label कामयाबी. Show all posts

Wednesday, September 19, 2012

छोटी सी कामयाबी पर



हमारी
छोटी सी कामयाबी पर
इतनी पीठ थपथपाई गयी
पीठ दर्द करने लगी
कामयाबी सर पर
चढ़ गयी
अपने आप को बड़े भारी
हूनर मंद समझने लगे
थोड़ी सी कामयाबी में
मदहोश हो गए
भूल गए
आगे बढ़ने के लिए
लक्ष्य को
याद रखना होता
मेह्नत से मुंह ना
मोड़ना होता
नतीजा वही हुआ
जो होना था
होश में आये तो देखा
हम चौराहे पर खड़े थे
लोग आगे बढ़ गए
हम वहीं खड़े रह गए
735-31-19-09-12

Saturday, September 1, 2012

जब भी चढ़ जाती है,कामयाबी सर पर




जब भी चढ़ जाती है
कामयाबी सर पर
अपने भी पराये लगते हैं
जो भी करे तारीफ़
वही अच्छे लगते हैं
कामयाबी के गरूर में
भूल जाता इंसान
सच्ची बात कहने वाले ही
अपने होते हैं
जब तक रहती है
कामयाबी
मीठी बातों से लुभाने वाले
तब तक ही साथ
रहते हैं
01-09-2012
705-01-09-12


Thursday, March 8, 2012

कामयाबी नहीं मिली तो रोना किस बात का


कामयाबी नहीं मिली
तो रोना किस बात का
रोने से किसको मिला है
जो तुम को मिलेगा
उठो अब खड़े हो जाओ
मुंह लटकाना बंद करो
हँसते हुए कमर क़स लो
मेहनत करना शुरू करो 
ज़रूरी नहीं एक के
पीछे ही पड़े रहो
ये नहीं तो वो कर लो
इस में नहीं तो उस में
मिल जायेगी
कामयाबी इक दिन
तुम्हें ज़रूर मिलेगी
औरों को भी रास्ता
दिखायेगी
08-03-2012
326-60-03-12

Wednesday, July 20, 2011

इससे बेहतर कोई किस्मत नहीं

मेरा चमन लुट गया
कोई गिला नहीं
किसी और का बस गया
ये भी कम बात नहीं
मेरी बर्बादी से 
किसी को खुशी
बहते अश्कों से
किसी को हंसी मिली
इस से बढ़ कर तो कोई
कामयाबी नहीं
निरंतर उन्हें
खुश रखने की हसरत
अब पूरी हुयी
इससे बेहतर कोई
किस्मत नहीं  
20-07-2011
1211-91-07-11

Monday, March 28, 2011

सफलता का नुस्खा



हताश, निराश, व्यथित
अवसाद में जी रहा था
सफलता का स्वाद
कभी ना चख सका
सोचने लगा
जीने का अर्थ ना था
जान देने का इरादा किया
नदी की और चल पडा
नदी में कूदने के लिए
पुल पर जाने लगा
एक आवाज़ ने रोक लिया
बिना हाथ पैरों वाला
एक शख्श उससे
दस रूपये मांग रहा था
वो रुका,
उसने उसे भिखारी समझा
सोचा मरने से पहले
उसकी मदद कर दूं
कुछ दुआ उस की ले लूं
सौ रूपये का नोट उसे दिया
उसने लौटा दिया
बोला भिखारी नहीं हूँ
पुल का चौकीदार हूँ
पुल का टैक्स वसूलता हूँ
निरंतर मेहनत और जज्बे से
जीवन यापन करता हूँ  
कैंसर से पीड़ित हूँ
हिम्मत नहीं हारता हूँ
बात समझ में आ गयी 
उसने इरादा बदला,
फिर से काम में जुट गया
उसे सफलता का नुस्खा
मिल गया
28-03-03
533—203-03-11

Saturday, March 26, 2011

ना दे सका तुम्हें अहसास मेरा अब तक


ना दे सका तुम्हें  
अहसास मेराअब तक
अफ़सोस मुझे उसका
दिल में जो है मेरे
किसी
तरह समझा ना सका
हर कोशिश
नाकामयाब रही अब तक
ना निराश हूँ ना हताश हूँ
आदत हो गयी
नाकामयाबी सहने की
जज्बा
ख़त्म ना हुआ अब तक
कोशिश
निरंतर जारी रहेगी
कामयाबी
ना मिलेगी जब तक
26-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
514—184-03-11

Friday, March 25, 2011

ना मारो खुद को पल पल,हर पल जिया करो



कौन है,
जिसने ख्वाब नहीं देखे ?
कुछ पूरे हुए,कुछ अधूरे रहे
फिर क्यों इंसान 
निरंतर रोता रहता
जो बीत गया 
उसमें खोता रहता
भविष्य की चिंता में 
घुलता रहता
वर्तमान में दुखी रहता
जो मिला अब तक जानो उसे
धन्यवाद इश्वर को दो
बेहतर की उम्मीद करो
बोझ ना उसका मन में रखो
मिले ना मिले, 
मर्जी खुदा की समझो 
ना मारो खुद को पल पल
हर पल जिया करो
सन्देश दुनिया को भी 
दिया करो
25-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
504—174-03-11

मैं हंसता भी,मैं रोता भी




मैं हंसता भी
मैं रोता भी 
भावनाओं में बहता भी 
क्रोध भी करता
अफ़सोस भी करता
गलती भी करता
इंसान हूँ
 इंसान सा सब करता
मगर जहन में
बोझ नहीं रखता
दिल में जहर नहीं 
भरता
निरंतर
पीछे को पीछे छोड़
आगे बढ़ता
गलती की क्षमा 
माँगता
ना दोहराऊँ कोशिश 
करता
कभी कामयाब होता
कभी असफल होता
निरंतर चलता रहता
जो कहा सत्य ना लगे
तो माफ़ करना
सत्य लगे तो
होंसला बढाते रहना
25-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
500—170-03-11