निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
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Tuesday, March 5, 2013
Wednesday, December 5, 2012
हमने सर पर चढ़ाया तुमको
हमने सर पर चढ़ाया
तुमको
गिरते से उठाया तुमको
तुम समझने लगे
तुम काबिल
हम नाकाबिल हो गए
खुद को हम से भी ऊपर
समझने लगे
गरूर इतना छा गया
ज़हन में
खुद को खुदा समझने लगे
भूल गए
जब भी उतरोगे ज़मीन
पर कभी
सहारे के लिए कंधा तो दूर
कोई झांकेगा भी नही
897-15-05-12-2012
काबिल,नाकाबिल,घमंड,गरूर
Sunday, October 28, 2012
राजा है या फ़कीर
सड़क पर चलने
वाला
राजा है या
फ़कीर
पेड़ को फर्क
नहीं पड़ता
जो भी बैठता
उसके नीचे
उसे ही छाया
दे देता
ना घमंड ना
अहंकार उसे
निरंतर
हवा में लहराता
रहता
पक्षी छोटा
हो या बड़ा
उसे अंतर नहीं
पड़ता
जो भी बनाता
घोंसला
ड़ाल पर
उसे ही बसेरा
बसाने देता
इंसान देखता
भी सब है
समझता भी सब
है
अहम् उसे इंसान
बनाए नहीं रखता
सदियों से लुटता
रहा है
अहम् में
लुटना फिर भी
नहीं
छोड़ता
कहलाता इंसान
हैवान बनना
फिर भी नहीं
छोड़ता
थोड़ा सा भी
पेड़ से
सीख लेता
भगवान् तो नहीं
इंसान बन कर
तो
जी लेता
814-56-28-10-2012
घमंड,अहंकार,अहम्,स्वार्थ,जीवन ,ज़िन्दगी
Wednesday, September 19, 2012
छोटी सी कामयाबी पर
हमारी
छोटी सी कामयाबी
पर
इतनी पीठ थपथपाई
गयी
पीठ दर्द करने
लगी
कामयाबी सर
पर
चढ़ गयी
अपने आप को
बड़े भारी
हूनर मंद समझने
लगे
थोड़ी सी कामयाबी
में
मदहोश हो गए
भूल गए
आगे बढ़ने के
लिए
लक्ष्य को
याद रखना होता
मेह्नत से मुंह
ना
मोड़ना होता
नतीजा वही हुआ
जो होना था
होश में आये
तो देखा
हम चौराहे पर
खड़े थे
लोग आगे बढ़
गए
हम वहीं खड़े
रह गए
735-31-19-09-12
Friday, September 7, 2012
उन्हें तो बरसना है,केवल बरसना है
बादलों को
किसी और बात से
क्या लेना देना
उन्हें तो बरसना है
केवल बरसना है
यह भी नहीं पता
कहाँ बरसना है
कितना बरसना है
चाहे किसी का घर ढह
जाए
कोई पानी में बह जाए
पेड़ पौधे गल जाएँ
मानवीय भावनाओं से
दूर
घमंड में सफलता की
ऊंचाइयां छू रहे
लोगों का भी यही हाल
है
वो भी केवल
अपने लिए ही जीते हैं
उनकी भूख मिटनी चाहिए
किसी और से उन्हें
क्या मतलब
07-09-2012
727-23-09-12
Thursday, September 6, 2012
घमंड
नीलगिरी के
लम्बे ऊंचे
पेड़
आसमान को छूने
की
कोशिश में
घमंड में सीना
ताने
खड़े रहते हैं
उसके आस पास
लगे
छोटे पौधों
की तरफ
झांकते तक नहीं
कोई राहगीर
उनकी
छाया में बैठता
नहीं
ना तो वो
आसमान को छू
पाते
ना ही उन्हें
किसी की
दुआ मिलती
06-09-2012
724-20-09-12
Saturday, September 1, 2012
प्रतीक्षा में
अनमने
भाव लिए
नदी किनारे कदम्ब के
पेड़ के नीचे बैठी
विचारों के जाल में उलझी थी
ऊपर गगन में काले बादलों की
गडगडाहट
उधर मन में विचारों का द्वन्द
उसकी व्यथा को बढ़ा रहे थे
नदी त्वरित गति से बह रही
पथ में आने वाली हर वस्तु को
अपने साथ बहा कर ले जा रही
नदी के पानी की भाँती
विचार भी त्वरित गति से
आ जा रहे थे
मन में ढेरों आशंकाएं उसकी
आकांशाओं को निराशा में
बदल रही थी
प्रियतम से मिले महीनों
हो गए
बार बार के वादों के बाद भी
नहीं आये
हर बार नए बहाने का
सन्देश अवश्य आया
अब प्रतीक्षारत थी
कब नदी के पानी की धारा
मंद पड़ेगी
आकाश से काले बादल
विदा होंगे
नीले गगन के दर्शन होंगे
सूरज फिर चमकने लगेगा
तब उसकी प्रतीक्षा की
घड़ियाँ भी समाप्त होंगी
उसके मन के आकाश में
आशाओं का सूरज चमकेगा
उसका प्रियतम से मिलन होगा
निराशा के काले बादलों से
छुटकारा मिलेगा
नदी किनारे कदम्ब के
पेड़ के नीचे बैठी
विचारों के जाल में उलझी थी
ऊपर गगन में काले बादलों की
गडगडाहट
उधर मन में विचारों का द्वन्द
उसकी व्यथा को बढ़ा रहे थे
नदी त्वरित गति से बह रही
पथ में आने वाली हर वस्तु को
अपने साथ बहा कर ले जा रही
नदी के पानी की भाँती
विचार भी त्वरित गति से
आ जा रहे थे
मन में ढेरों आशंकाएं उसकी
आकांशाओं को निराशा में
बदल रही थी
प्रियतम से मिले महीनों
हो गए
बार बार के वादों के बाद भी
नहीं आये
हर बार नए बहाने का
सन्देश अवश्य आया
अब प्रतीक्षारत थी
कब नदी के पानी की धारा
मंद पड़ेगी
आकाश से काले बादल
विदा होंगे
नीले गगन के दर्शन होंगे
सूरज फिर चमकने लगेगा
तब उसकी प्रतीक्षा की
घड़ियाँ भी समाप्त होंगी
उसके मन के आकाश में
आशाओं का सूरज चमकेगा
उसका प्रियतम से मिलन होगा
निराशा के काले बादलों से
छुटकारा मिलेगा
01-09-2012
706-02-09-12
जब भी चढ़ जाती है,कामयाबी सर पर
जब भी चढ़ जाती
है
कामयाबी सर
पर
अपने भी पराये
लगते हैं
जो भी करे तारीफ़
वही अच्छे लगते
हैं
कामयाबी के
गरूर में
भूल जाता इंसान
सच्ची बात कहने
वाले ही
अपने होते हैं
जब तक रहती
है
कामयाबी
मीठी बातों
से लुभाने वाले
तब तक ही साथ
रहते हैं
01-09-2012
705-01-09-12
Tuesday, August 21, 2012
हर तरीका आजमाया हमने
हर तरीका
आजमाया हमने
हमारी तरफ
गर्दन तक नहीं
घुमायी उन्होंने
आदत से मजबूर
थे
हमें छिछोरा
समझते रहे
शक से देखते
रहे
घमंड में
नाक की सीध
में
चलते रहे
उन्हें पता
नहीं था
हम सड़क पर गिरे
उनके कानों
के झुमके को
लौटाने की
कोशिश कर रहे
थे
21-08-2012
668-28-08-12
Tuesday, July 31, 2012
ठहरे पानी में तुमने एक पत्थर फैंक दिया
ठहरे पानी में
तुमने
एक पत्थर फैंक
दिया
शांत तालाब
में
ज़लज़ला मच
गया
तुम्हारा चेहरा
मुस्काराहट
से भर गया
मछलियों में
डर का संचार
कर दिया
तुमने इतना
भी नहीं सोचा
उनको डराने
का अधिकार
तुम्हें किसने
दिया
कभी सोचा तुमने
क्यों ऐसा व्यवहार किया
केवल इसलिए
कि
वो निर्बल है
तुमसे
अपने आमोद का
साधन बना लिया
अपने बल के
घमंड में
निरीह मछलियों
को
हैरान किया
31-07-2012
636-33-07-12
Friday, February 24, 2012
छुप जाओगे समय की गहराइयों में एक दिन
सूरज की तरह अस्त
हो जाओगे एक दिन तुम
उतर जाओगे
शिखर से धरती पर तुम
छुप जाओगे समय की
गहराइयों में एक दिन
क्यूं फिर
इतना घमंड रखते हो
बैर से जीते हो
इंसानों सा व्यवहार
नहीं करते हो तुम
क्यों भूल जाते हो
जीवन का सत्य
काल के गाल में समा
जाओगे एक दिन
हँस कर बात कर लो
सब को
बराबर समझो तुम
24-02-2012
236-147-02-12
Thursday, February 16, 2012
याद रहेंगे सिर्फ कारनामे तुम्हारे
ना घमंड में चूर रहो
ना ही
समझो वक़्त यही
रहेगा हर दम
जब तक है दम में दम
सोचते हो झुका दोगे
आसमां को भी तुम
समझते नहीं
किसी को कुछ भी तुम
जब बचेगा नहीं
तुम में दम
दबा दिए जाओगे
ज़मीं के अन्दर तुम
ना करेगा
याद तुम्हें कोई
भूल जायेंगे सब
याद रहेंगे
सिर्फ कारनामे
तुम्हारे
16-02-2012
174-85-02-12
Thursday, December 22, 2011
कविता का अर्थ
उसने
कविता लिखना
प्रारम्भ किया
कविताओं का चर्चा
शहर में होने लगा
आम आदमी को
कविताओं में कही
बातों का
अर्थ समझ आने लगा
वो स्वयं को सफल
कवी समझने लगा
निरंतर बिना रुके
कवितायें लिखने लगा
एक दिन
साहित्य से जुड़े
बुजुर्ग मित्र ने कविताओं में
निखार लाने के लिए
नामचीन कवियों की
कविताओं को पढने का
परामर्श दिया
उसने कविताओं को
अलंकरणों,छंदों,एवं शुद्ध
साहित्यिक शब्दों से
सुसज्जित पाया
समझने के लिए
मष्तिष्क पर
जोर डालता रहा
शब्द कोष छानता रहा
आम भाषा में लिखने
वाले को
कविता का अर्थ समझ
आ गया
सर पर मानों घड़ों
पानी पड़ गया
कबीर,रहीम को लोग
अब तक
क्यों याद करते हैं ?
जानने के लिए सर
खुजाने लगा
21-12-2011
1878-46-12
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