निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
Tuesday, March 6, 2012
एक बार हमारी तरफ देख लो
Tuesday, August 16, 2011
आज किसी ने याद किया
याद किया
जन्म दिन पर एक
फूल भिजवा दिया
खुदा से इबादत का
सिला मिल गया
मुरझाये पेड़ को
पानी मिल गया
निरंतर बेबसी को
सहारा मिल गया
फिर मुस्कारने का
बहाना मिल गया
जीने का मकसद
मिल गया
16-08-2011
1364-86-08-11
Wednesday, August 3, 2011
कुछ कहता रहूँ कुछ ना कुछ लिखता रहूँ
कुछ कहता रहूँ
कुछ ना
कुछ लिखता रहूँ
कोई और
काम मुझे अब नहीं
निरंतर
ज़िक्र तेरा करता रहूँ
तूँ ही मकसद
तूँ ही ज़िन्दगी मेरी
लाख दिल को
समझाऊँ
दिल भी मानता नहीं
अब तूँ ही मंजिल मेरी
कैसे भी मिल जाओ
अब यही हसरत मेरी
03-08-2011
1297-19-08-11
बिना कहे बहुत कुछ कह दिया
से उन्हें देखा
शरमा के उन्होंने मुंह
फिरा लिया
बिना कहे बहुत कुछ
कह दिया
मोहब्बत की आग को
सुलगा दिया
ख़्वाबों,ख्यालों को
उनकी
सूरत से भर दिया
निरंतर
इंतज़ार का बहाना
जीने का मकसद
दे दिया
03-08-2011
1296-18-08-11