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Tuesday, March 6, 2012

एक बार हमारी तरफ देख लो

एक बार
हमारी तरफ देख लो
तो कुछ
उम्मीद बंध जाए
देख कर मुस्कारा दो
तो ग़मों का बोझ कम
हो जाए
कुछ लफ्ज़ मोहब्बत के
कह दो
तो दिल को राहत
मिल जाए
डूबी हुयी हसरतें फिर से
जग जाएँ
हमें जीने का मकसद
मिल जाए
06-03-2012
303-37-03-12

Tuesday, August 16, 2011

आज किसी ने याद किया

आज किसी ने

याद किया

जन्म दिन पर एक

फूल भिजवा दिया

खुदा से इबादत का

सिला मिल गया

मुरझाये पेड़ को

पानी मिल गया

निरंतर बेबसी को

सहारा मिल गया

फिर मुस्कारने का

बहाना मिल गया

जीने का मकसद

मिल गया

16-08-2011

1364-86-08-11

Wednesday, August 3, 2011

कुछ कहता रहूँ कुछ ना कुछ लिखता रहूँ

तेरे बारे में

कुछ कहता रहूँ

कुछ ना

कुछ लिखता रहूँ

कोई और

काम मुझे अब नहीं

निरंतर

ज़िक्र तेरा करता रहूँ

तूँ ही मकसद

तूँ ही ज़िन्दगी मेरी

लाख दिल को

समझाऊँ

दिल भी मानता नहीं

अब तूँ ही मंजिल मेरी

कैसे भी मिल जाओ

अब यही हसरत मेरी

03-08-2011

1297-19-08-11

बिना कहे बहुत कुछ कह दिया

निगाह-ऐ-मोहब्बत

से उन्हें देखा

शरमा के उन्होंने मुंह

फिरा लिया

बिना कहे बहुत कुछ

कह दिया

मोहब्बत की आग को

सुलगा दिया

ख़्वाबों,ख्यालों को

उनकी

सूरत से भर दिया

निरंतर

इंतज़ार का बहाना

जीने का मकसद

दे दिया

03-08-2011

1296-18-08-11