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Thursday, April 4, 2013

नदी के दो किनारे



हमारे सम्बन्ध
नदी के दो किनारों
जैसे हो गए  हैं
किनारे मिल भी नहीं सकते 
संबंधों का बहता पानी
दोनों किनारों को
सामान रूप से छूता है
इस कारण
अलग भी नहीं हो सकते
अगर यही मनोस्थिति रही
स्वार्थ और घ्रणा से पानी
इस हद तक दूषित हो जाएगा
एक दिन दोनों किनारे
टूट जायेंगे
हमारे सम्बन्ध भी
कभी ना बनने के लिए
नदी के पानी की तरह
बिखर जायेंगे
ऐसा हो उससे पहले आओ
एक कदम मैं बढाता हूँ
एक कदम तुम बढ़ाओ
अहम् को
मन से निकाल फैंको
बहते पानी को
रिश्तों का पुल समझ कर 

दोनों किनारों को मिला दो
08-64-04-02-2013
रिश्ते,सम्बन्ध,किनारे,नदी के किनारे ,जीवन
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Saturday, October 15, 2011

उन्हें कौन किनारे कौन लगाएगा ?


जिनके
दिल ज़ख्मों से भरे
वो अब हमदर्दी जताते
खुद की किश्ती
मंझधार में फंसी
हमें तैरना सिखाते
हमारे प्यार का
निरंतर तमाशा बनाते
खुद दो कदम
साथ ना चल सके
हमें साथ चलने की
नसीहत देते
हम तो फिर भी सुन लेंगे
उनका कहा कर लेंगे
उन्हें कौन किनारे कौन
लगाएगा ?
इस गम में निरंतर
ग़मगीन  रहते
15-10-2011
1658-66-10-11

Wednesday, March 30, 2011

दिल से पूंछता हूँ



निरंतर,
दिल से पूंछता हूँ
कैसे दर्द उसका कम
करूँ
प्यास उसकी बुझाऊँ
शमा मोहब्बत की
फिर से जलाऊँ
अरमानों की किश्ती
किनारे लगाऊँ
थक गया
बेरहम दुनिया से
हंस कर
ज़ख्म खाते खाते
मलहम
कौन सा लगाऊँ
कहाँ से
कोई मेहरबाँ लाऊँ
जो खिजा को बहार में
बदल दे
तुझे सुकून दे दे
30-03-03
551—221-03-11