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Thursday, September 1, 2011

अतीत का दस्तावेज

कोने में पडा
वक़्त की मार से
पीला पड़ गया ख़त
रद्दी का टुकडा नहीं 
अतीत का दस्तावेज है 
मेरे दोस्त की
दोस्ती का सबूत है 
उसकी भावनाओं का
प्रतीक है 
मेरे लिए खुशनुमा
माहौल में
लौटने का रास्ता है
उस ख़त को पढ़ना
जाने वाले को
श्रदांजली देने का
खूबसूरत ढंग  है
निरंतर
मन मष्तिष्क में
मंद पड़ गए
संबंधों की गर्माहट
महसूस करने की
अद्भुत विधि  है
अतीत को वर्तमान में
देखने का सुन्दर
तरीका है
01-09-2011
1426-01-09-11

Tuesday, July 12, 2011

चेहरे पर चेहरा

तुम्हारे वो ख़त
सम्हाल कर रखे मैंने
जिनमें 
चाहत के नग्मे लिखे
हाल-ऐ-दिल बयाँ करा 
तुमने
ख़्वाबों के किस्से भरे
साथ मरने,
जीने के फलसफे लिखे 
उनमें अक्स 
तुम्हारा देखा मैंने
उन्हें पढ़ना खुदा की 
इबादत समझा
निरंतर 
सीने से लगा कर रखा
जाँ से भी ज्यादा 
कद्र करी उनकी  मैंने
फिर क्यों रुस्वां हो गए
क्यों दिल से निकाला 
मुझ को
कोई बहाना ना बनाना
खेल मोहब्बत का 
खेला तुमने
नहीं बख्शेगा खुदा 
तुमको
उसे भी पसंद नहीं
चेहरे पर चेहरा
बेवफायी का सिला
अब वो ही देगा 
तुमको
12-07-2011
1171-55-07-11
12-07-2011
1171-55-07-11

Wednesday, March 30, 2011

दिल करे तो जवाब दे दें ,नहीं तो सपने में आ कर बता दें


क्यूं ख़त का 
जवाब उन्होंने अब तक
दिया नहीं
या तो ख़त मिला नहीं
या मतलब समझा नहीं
या तो नाराज़ हो गए
शक से देखने लगे
या फिर वक़्त मिला नहीं
 निरंतर क्यां लिखूं ?
क्या ना लिखूं ?
के चक्कर में फँस गए
या कैसे लिखूं
के सोच में पड़ गए
कौन उन्हें समझाए

दिल करे तो जवाब
दे दें
नहीं तो सपने में
आ कर बता दें
30-03-03
554—224-03-11