Showing posts with label हँसना. Show all posts
Showing posts with label हँसना. Show all posts

Tuesday, March 12, 2013

मेरी बात मान लो यारों



कोई मोहब्बत के रोने
रो रहा है
गम में आसूं बहा रहा है
कोई यादों में खोया हुआ है
भावनाओं के आगे भी
ज़िन्दगी बहुत है यारों
कभी कभी थोड़ा सा
हँस भी लिया करो यारों
नहीं तो समय से पहले
दुनिया से चले जाओगे
इसको भी जान लो यारों
सोचने समझने में
समय व्यर्थ मत करो
मेरी बात मान लो यारों
अभी से ही खुल कर हँसना
प्रारम्भ कर दो यारों
22-22-12-01-2013  
मोहब्बत,गम,हँसी,हँसना,ज़िन्दगी
डॉ.राजेंद्र तेला,निरंतर   

Thursday, July 5, 2012

शुक्रिया अदा करता रहा



चेहरे पर उदासी का
मुलम्मा चढ़ाए
चलते चलते
अरसा हो गया था
हँसना ही भूल गया था
रास्ते में
ह्रदय को भाये
ऐसा साथी मिल गया
डूबते को सहारा
नाउम्मीद को
उम्मीद का साथ
मिल गया
हँसना भी याद आ गया
कुछ पल भी नहीं गुजरे
किस्मत ने चौराहे
पर ला खडा किया
मैं रुका नहीं
निरंतर चलता रहा
हँसना भी भूला नहीं
कुछ पल के साथी को
साथ निभाने का
हँसना याद दिलाने का
शुक्रिया
अदा करता रहा   
05-07-2012
605-02-07-12

Sunday, May 6, 2012

धूप छाँव


कई दिन बाद
वो हँस कर बोले
उनकी हँसी
कितनी देर रहेगी
कब मुंह लटका कर
बैठ जायेंगे
आंसू बहाने लगेंगे 
इस डर से उनके साथ
हँस नहीं सका
उनका धूप छाँव सा
हँसना रुलाना
अब सह नहीं पाता
हँसना चाहूँ उससे
पहले ही रोना पड़ता
पर उनका मोह मुझे
उनसे दूर भी नहीं होने देता
गलती उनकी नहीं है ,
इसलिए सह रहा हूँ
लोगों ने
 इतना रुलाया उनको
कि हँसना ही भूल गए थे
रोना,रुलाना,
जीने का तरीका बन गया
बहुत समझाने के बाद
कभी कभी हँसने तो लगे हैं
जिस दिन निराशा से
मुक्त हो जायेंगे
हँसना उनके जीवन का
तरीका बन जाएगा 
मैं भी मन से
उस दिन ही हँस 
पाऊंगा
05-05-2012
498-13-05-12

Tuesday, April 17, 2012

आज इतना हँसो


आज इतना हँसो कि
हँसी तुमसे खुद पूछे
तुम्हें हुआ क्या है ?
क्या बात हुयी ऐसी 
जो दिल इतना खुश है
क्यूं छिपा कर रखा है ?
मुझे भी बता दो
वो राज़ क्या है
17-04-2012
450-30-04-12

Saturday, March 3, 2012

अब बचा नहीं कुछ बताने को

लुटा चुका सब
कुछ बचा नहीं
अब लुटाने को
इतना कुछ देख लिया
बचा नहीं अब
कुछ और देखने को
इतना रो लिया अब तक
मन नहीं करता
अब हँसने का
जी रहा हूँ किस तरह
अब बचा नहीं कुछ
बताने को
सुकून क्या होता है
भूल गया हूँ
समझता हूँ  सुकून
अब चुप रहने को
03-03-2012
287-22-03-12

Saturday, February 11, 2012

ना कोई समझा ना ही जाना हमें

ना कोई समझा
ना ही जाना हमें
हँसने की चाह ने
इतना रुलाया हमें
जीना ही भूल गए
हमदर्दी की आस में
दर्द गले लगाते रहे
ना बची अब कोई चाह
ना किसी से कोई आस
हर शख्श से
खौफ खाते हैं हम
फिर ज़ख्म खाने से
डरते हैं हम
अब सोच लिया हमने
खामोशी से सहते रहेंगे
कहेंगे नहीं अपने दर्द
अब किसी से
चले जायेंगे दुनिया से
इक दिन यूँ ही
रोते रोते
11-02-2012
148-59-02-12

Sunday, January 15, 2012

कैसे अहसान चुकाएँ तुम्हारा ?

दर्द दिए लोगों ने
तुमने हमें सुकून दिया
ज़ख्म दिए लोगों ने
तुमने मरहम लगाया
लोगों ने रास्ता
दोजख का दिखाया
तुमने फिर से हँसना
सिखाया
जीना भूल गए थे
तुमने फिर से जीना
सिखाया
जो भी सिखाया तुमने
हमने ज़िन्दगी में उतारा
जानते नहीं
कैसे अहसान चुकाएँ
तुम्हारा ?
क्या करें जो दिल का
बोझ हल्का कर दे?
अहसानों के
कर्जे को कम कर दे
हमारे सुकून में इजाफा
कर दे
अहसान फिर भी चुका
ना पायेंगे
कतरा भी ना दे पायेंगे
उसका
जितना तुमने दिया
हमको
15-01-2012
46-46-01-12