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Friday, November 23, 2012

कैसी ये दुनिया,कैसे ये लोग



कैसी ये दुनिया
कैसे ये लोग
कभी नाराज़ हो जाते हैं
उन बातों पर
जिन पर नाराज़ नहीं
होना चाहिए
कभी नाराज़ नहीं होते हैं
उन बातों पर जिन पर
नाराज़ होना चाहिए
अव्वल तो नाराज़
होना ही नहीं चाहिए
फिर भी
होना हो तो हो जाएँ
उन बातों पर जिन पर
नाराज़ होना चाहिए
पर रिश्ते तो नहीं बिगाडें
मगर अफ़सोस
लोग रिश्ते बिगाड़ लेते हैं
उन बातों पर
जिन पर नाराज़ भी
नहीं होना चाहिए
862-46-23-11-2012
दुनिया,लोग,नाराजगी,नाराज

Thursday, March 15, 2012

मैं चुप हूँ अगर तो ये ना समझना ,तुम्हें भूल गया हूँ

मैं चुप हूँ अगर
तो ये ना समझना
तुम्हें भूल गया हूँ
दिल अब भी तुम्हारे
लिए रोता है
हर लम्हा तुम्हें याद
करता है
ये बात जुदा है
नहीं चाहता
मुझे गम में डूबा
देख कर
तुम भी ग़मों में डूब
जाओ
अपनी बसी हुयी
दुनिया को उजाड़ दो
15-03-2012
374-108-03-12

Sunday, January 15, 2012

कल कह ना सकूं

कल कह ना सकूं
दिल की बात आज ही
कहना चाहता हूँ
रात सोऊँ सवेरे उठ
ना पाऊँ
इस तरह दुनिया से
रुखसत होना चाहता हूँ 
सबको हँसते गाते
छोड़ कर जाना चाहता हूँ 
जानता हूँ जब भी कोई
अपना जाता
दिल कितना रोता है
किसी अपने को
रुलाना नहीं चाहता हूँ
याद कर
आंसू ना बहाए कोई
जाने के बाद किसी को
याद नहीं आऊँ
ज़िन्दगी के सफ़र में
मिला था मुसाफिर कोई
समझ कर
भुला दिया जाऊं
दुखाया हो
दिल किसी का कभी
हुयी हो गलती कोई
तो जीते जी
माफ़ कर दिया जाऊं  
जाने के बाद
दिल किसी का दुखाना
नहीं चाहता हूँ
दे नहीं सका खुशी जिन्हें
उन्हें खुश देखना
चाहता हूँ
बना ना सका अपना
जिन्हें 
उन्हें अपना बनाना
चाहता हूँ
बचे वक़्त का हर लम्हा
दूसरों के लिए जीना
चाहता हूँ
 जो चाहता है मुझे 
मिल नहीं सका जिससे
उससे मिलना
चाहता हूँ
कल कह ना सकूं
दिल की बात आज ही
कहना चाहता हूँ
सुकून से जाना
चाहता हूँ   
15-01-2012
43-43-01-12

Tuesday, January 10, 2012

कैसे बताऊँ क्या है दिल में तुम्हारे लिए?


कैसे बताऊँ क्या है
दिल में तुम्हारे लिए?
कैसे कहूं
क्या मिलता है मुझे
तुमसे गुफ्तगू कर के?
क्यों तुम्हारा नाम आता है ?
जहन में बार बार
न तुम माशूक मेरे
ना मैं आशिक तुम्हारा
फिर भी मन नहीं मानता
खामोश रहने के लिए
कैसे समझाऊँ?
कुछ तो
मिलता होगा तुमसे
जो मिला नहीं मुझे
अभी तक अपनों से
दिल रोता रहा अब तक
जिसको पाने के लिए
कोई तो है
जो समझता है मुझ को
ऐसा अहसास होता है
दिल को सुकून 
ज़ज्बातों को मुकाम
मिलता है
रिश्ता पिछले जन्म का
लगता है
अकेला नहीं हूँ ऐसा
लगता है
कैसे बताऊँ क्या है
दिल में तुम्हारे लिए?
10-01-2012
24-24-01-12

Sunday, October 9, 2011

तरीका बड़ा अजब दुनिया का



तरीका बड़ा अजब
दुनिया का
किसी को चैन
रुला कर मिलता
किसी को तडपा कर
मिलता
मुझे चैन हँस कर
मिलता
लोगों को हँसा कर
मिलता
लाख नफरत रखे कोई
मुझे मोहब्बत से
सुकून मिलता
हर शख्श से
निरंतर गले लग कर
मिलता 
09-10-2011
1626-34-10-11

Friday, July 8, 2011

वर्तमान में जीना चाहता

बीते दिनों को भूलना चाहता
मचलते बचपन
बहकते यौवन
बड़ों का आशीर्वाद
छोटों का सम्मान
साथ हंसना,साथ रोना
महकते फूल
फलते फूलते घने जंगल
पक्षियों का चहचहाना
नदी का
स्वच्छ निर्मल जल
अनछुए आकाश छूते
 पहाड़
घर जैसे मोहल्ले
भाई से बढ़ कर दोस्त
किसी को याद नहीं करना चाहता
निरंतर इन्हें याद कर
जीवन के अंतिम क्षणों  में
कष्ट नहीं पाना चाहता
जो थोड़ी सी मुस्कान
बची है
उसे सम्हाल कर
रखना चाहता
दुनिया को
दिखाने के लिए
मुस्काराते चेहरे के साथ
जाना चाहता  
08-07-2011
1154-38-07-11

Sunday, April 10, 2011

उम्र सवाल सुनने में बीत गयी


उम्र सवाल
सुनने में बीत गयी
जवाब देते देते जुबान
थक गयी
यकीन मेरा किसी ने
ना किया
मेरे हर जवाब को
झूंठा कहा
सच सुनना किसी को
पसंद नहीं
सच को झूंठ बताना मेरी
फितरत नहीं
निरंतर दोगले चेहरों का
कहर सहा मैंने
उम्र के इस पड़ाव पर
आदत बदलूंगा नहीं
मौत आने तक बात अपनी
कहता रहूँगा
सुकून दुनिया को कभी ना
दे पाऊंगा
खुश हूँ , खुद तो सुकून 
से जाऊंगा   
09-04-2011
636-69-04-11