Sunday, July 29, 2012

तब से अब तक



संगीत की
मदमाती धुनों के बीच
सहेलियों के साथ नृत्य में
तल्लीन थी
अचानक हाथ को
सुहावना स्पर्श मिला
एक सुखद अनुभूती का
आभास हुआ
एक सिहरन शरीर में 
दौड़ गयी
गूँज ह्रदय में पहुँच गयी
ह्रदय उल्लास से कहने लगा
यही वो सपना है
जिसे तुम
निरंतर देखती रही हो
साकार करने के लिए
अब तक भटक रही हो
जाओ उसका आलिंगन करो
उसमें समा जाओ
उस ने तुरंत गर्दन घुमायी
मनमोहिनी सूरत को
देखते ही निस्तेज हो गयी
मुंह से एक
शब्द भी नहीं निकला
अब लक्ष्य की प्राप्ती
 हो जायेगी
विचारों में मग्न अपनी
सुध बुध खो दी
यथार्थ के संसार में लौटी 
तो सब कुछ धुंधला गया
लाख प्रयत्न के बाद भी
सिवाय सहेलियों के
कोई नहीं दिखा ,
सपना टूट गया
विश्वास ही नहीं हुआ
लहर किनारे से मिलने से
पहले ही
आशाओं के समुद्र में
विलीन हो गयी
तब से अब तक फिर
लक्ष्य की खोज में
भटक रही है
29-07-2012
625-22-07-12

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