Sunday, May 1, 2011

हर नज़्म-ओ- ग़ज़ल को,तुम्हारी यादों से भरा

लिखा मैंने
जहन में तुम्हें रखा मैंने
हर लफ्ज को
तुम्हारी खुशबू से भरा
हर ख्याल तुम्हारा
कागज़ पर उतारा
हर नज़्म-ओ- ग़ज़ल को
तुम्हारी यादों से भरा
निरंतर दिल का हाल
बताता रहा
तुम्हें अपने करीब
समझता रहा
01-05-2011
795-02-05-11

1 comment:

Unknown said...

बहुत सुन्दर लिखा आपने. बधाई.

आपका स्वागत है.
दुनाली चलने की ख्वाहिश...
तीखा तड़का कौन किसका नेता?