Tuesday, January 3, 2012

लोग क्या कहेंगे ?


बड़े से मन से मैंने
पसंद के कपडे का कोट
सिलवाया
पहन कर यार दोस्तों के बीच
पहुँच गया
आशी थी सब कोट की
प्रशंसा करेंगे
मेरी पसंद की दाद देंगे
किसी ने प्रशंसा में
एक शब्द भी नहीं कहा
उलटा एक मित्र ने,
कोट को पुराने तरीके का
बता दिया
मन खिन्न,आशाओं पर
तुषारा पात हो गया
घर लौटते ही उसे 
अलमारी में टांग दिया
तय कर लिया
अब उसे कभी नहीं पहनूंगा
जो पैसे खर्च हुए,उन्हें भूल
जाऊंगा
साल भर कोट अलमारी में
टंगा रहा
सर्दी आने पर अलमारी खोली
तो कोट नज़र आया 
समारोह में जाना था
मन ने कहा तो
फिर उसे पहन लिया
समारोह में पहुँचते ही
कोट को भूल गया
मुझे यकीन नहीं हुआ
जब किसी ने कहा
आपने बहुत सुन्दर कोट
पहना है  
फिर एक के बाद एक
कई लोगों ने कोट की
प्रशंसा करी
मन खुश हो गया
तय कर लिया
अब हर समारोह में
इसी कोट को पहनूंगा
घर लौटते समय सोचने लगा
एक व्यक्ति ने कोट की
हँसी उडाई
तो मैंने उसकी बात को
ह्रदय में उतार लिया
कोट को मन से उतार दिया
आज कुछ लोगों ने कोट की
प्रशंसा करी
तो गर्व से सीना फूल गया
क्यों थोड़ी सी प्रशंसा
सर पर चढ़ती ?
छोटा सा कटाक्ष बुरा
लगता
क्यों हम लोगों के कहने को
इतना महत्व देते ?
अपनी पसंद को
किसी के कहने भर से
छोड़ देते
ऐसे जीवन का क्या अर्थ?
जिसमें मनुष्य
मन की इच्छा से
कुछ नहीं कर सकता
सदा लोग क्या कहेंगे कि
चिंता में डूबा रहता
अनमने
भाव से जीता जाता
03-01-2012
11-11-01-12

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