Friday, April 1, 2011

मैं हँसता रहा


 दुनिया 
ने नकारा कहा
मैं हँसता रहा
लोगों ने खुदगर्ज़ कहा
मैं हँसता रहा
 माशूक ने बेवफा कहा
मैं हँसता रहा
गुरुओं ने मूर्ख कहा
मैं हंसता रहा
अपनों ने पराया कहा
मैं हँसता रहा
  बेईमानों ने बेवकूफ कहा 
मैं हँसता रहा
   दोस्तों ने मुंह फट कहा  
मैं हँसता रहा
वो थक गए
मैं हँसता रहा
मुझे ढीठ कहा
मैं हँसता रहा
कहना बंद कर दिया
मैं हँसता रहा
जैसा हूँ,मंज़ूर किया
निरंतर
उसूलों पर चलता रहा
चाहने वालों ने
फिर भी चाहा
कभी कुछ ना कहा
01-04--11
576—09-04-11

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