Tuesday, April 12, 2011

मोहब्बत हमेशा दिल से होती,मौत के बाद भी ख़त्म ना होती

किसी को दिल चाहता
कोई सूरत से भाता
फैसला मुश्किल था
हमसफ़र किसे
बनाऊँ?

सूरत को मंजिल बनाऊँ ?
या चाहत को तवज्जो दूं ?
निरंतर पशोपश में पडा था
इधर जाऊं या उधर जाऊं
तभी पैगाम खुदा का आया
सूरत हमेशा एक ना रहती
वक़्त के साथ आती जाती
सीरत इंसान की कभी ना
मिटती
मोहब्बत हमेशा दिल से
होती
मौत के बाद भी ख़त्म
ना होती
12-04-2011
661-94-04-11

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