Tuesday, April 5, 2011

निरंतर अँधेरे के बाद,उजाला आता


का महीना आया
गुलमोहर
उदास होने लगा
अब पत्ते गिरेंगे
वो लावारिस सा 
दिखेगा
पक्षी बैठना बंद करेंगे
घोंसले रीते होंगे
बिना छाया
कोई नीचे नहीं बैठेगा
इस दुःख में डूब गया
आंसूं बहाने लगा
धैर्य खोने लगा
भूल गया अप्रैल में
नए पत्ते आएँगे
लाल फूलों से लदेगा
पक्षी पहले से ज्यादा
आयेंगे
नए घोंसले बनाएँगे
चहचाहट से
वातावरण में जीवन का
अहसास कराएँगे
लोग इच्छा से
उसकी छाया में बैठेंगे
हर वर्ष भूल जाता
धैर्य भी रखना होता
समय सदा एक सा
नहीं रहता
निरंतर अँधेरे के बाद
उजाला आता
05-04-2011
603-36 -04-11