208--02-11
दो बूँद
आँसूं की आँखों से
निकली
बात मन की बाहर
निकली
दिल की पीड़ा
लोगों को पता चली
“निरंतर” छुपी थी
अब आम हो गयी
शहर में चर्चा का
दौर चलेगा
हर शख्श मतलब
अलग निकालेगा
निरंतर सवाल करेगा
बूंदों की जगह
आंसूंओं का झरना
बहेगा
गम और बढेगा
कौन इस बात को
समझता
हर शख्श हमदर्दी
दिखाता
ज़ख्मों में इजाफा
करता
05-02-2011
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