Saturday, February 18, 2012

कौन समझाए इन्हें?

इन आँखों ने देखे
बेहद खूबसूरत नज़ारे
कल कल करते झरने
रंग बिरंगे फूल,
ऊंचे सुन्दर पहाड़
भाँती भाँती के जानवर
नयनाभिराम पक्षी
फिर भी
इनकी इच्छा पर
विराम नहीं लगता
नित नया
देखने की चाहत में
कुछ ना कुछ खोजती
रहती हैं
कभी विश्राम नहीं करती
सोचती होंगी
सदा के लिए
बंद होने से पहले ही
सब कुछ
अपने अन्दर समेट लें

कौन समझाए इन्हें?
इच्छाएं अनंत होती हैं
संसार की उत्पत्ती के
समय से
किसी की पूरी नहीं हुयी
इनकी
कैसे पूरी हो जायेगी
हो सकता है
आँखें जब नश्वर नहीं रहेंगी
अमरत्व पा जायेंगी
इनकी इच्छा भी पूरी
हो जायेंगी 
18-02-2012
190-101-02-12

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