Sunday, February 5, 2012

अब तो बता दो


अब तो बता दो
तुम्हारी ज़िन्दगी की
अलमारी के 
किस कौने में
तुमने मुझे रखा है
नए कपड़ों के जैसे
पहले खंड में,
जब भी बन ठन कर
जाना होता
उन्हें पहनते हो
या पसंदीदा
कपड़ों के जैसे
आँखों के बिलकुल
सामने
नए कपडे होते हुए भी
उन्हें ही पहनने का
मन करता
या मुझे उन
पुराने कपड़ों के जैसे
रखा है
जिन्हें ना पहने का
मन करता
ना ही फैकने का
मन करता है
या फिर टोपी,रुमाल ,
मोजों की तरह
और लोगों के साथ
एक कौने में सजा
रखा है
जो भी हाथ में आ जाए
मौके और ज़रुरत के
हिसाब से
उसे काम में ले लो
अब तो बता दो
ज़िन्दगी में तुमने
मेरा कौन सा स्थान
तय कर रखा है
05-02-2012
108-18-02-12

4 comments:

कविता रावत said...

हर किसी के लिए जिंदगी में कहीं न कही स्थान निश्चित रहता है, लेकिन सामने वाला ही बता सकता है वह किसे कौन से जगह रखता है.....बहुत बढ़िया मनोभाव..

JHAROKHA said...

pahli baar aapke blog par aana aur aapki prastuti ko padhna bahut bahut hi achcha laga.
behad sundarta ke saaath man ke bhaon ko aapne upmaon ke jariye vyakt kiya hai -----
badhai
poonam

आदित्‍य शुक्‍ला said...

जीने के लिए जरूरी है ये बताना,

कहां छुपा के रक्‍खा है तूने मुझे।

anju(anu) choudhary said...

जिंदगी की इस दौड़ में ....दोस्ती की दुनिया में ..एक कोना मेरा भी हैं ...