Monday, April 11, 2011

हाल-ऐ-दिल तुम्हारा,हमें पता है

हाल-ऐ-दिल
तुम्हारा हमें पता है
हमारे दिल जैसे ही वो भी
रोता है
लाख चेहरे पर मुस्कान का
मुलम्मा चढाओ
बार बार खुश हूँ के
नारे लगाओ
दर्द-ऐ-दिल पहचानने वाले
हाल-ऐ-दिल जान लेते
चुपके से कानों में बता जाते
सब्र से काम लेने की सलाह
भी दे जाते
तुम इतने तंग दिल भी नहीं
की दिल की सुनोगे नहीं कभी
निरंतर
ये हकीकत भी बताते जाते
11-04-2011
654-87-04-11

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