Tuesday, February 8, 2011

एक माँ ने बेटा खोया,सुहाग पत्नी का उजड़ा


192--02-11

एक माँ ने बेटा खोया
सुहाग पत्नी का उजड़ा
परिवार पिता विहीन हुआ
नवजात खिलने से
पहले मुरझाया
एक और विस्फोट हुआ
कई ज़िन्दगीयों का
अंत हुआ
आंतक वाद ने रंग
अपना दिखाया
तंग सोच वालों ने
काम अपना किया
इंसानियत को शर्मसार
किया
जहन में जहर भरा
दुनिया को बताया
क्यों भूल गए जाते
उनके भी भाई बहन हैं
वो भी किसी के भाई,बाप हैं
कैसा अहसास
उनके अपनों को होता होगा
जब उन का कोई मारा जाता
चेहरा उसका
सामने आता होगा
दिल उनका भी रोता होगा
क्यूं काम ऐसा करते
"निरंतर" नफरत से जीते
खुदा के बनाए उसूलों को
खुदा के नाम पर तोड़ते
उन्हें भी ऊपर जाना होगा
जवाब खुदा को  देना होगा
कैसे  उसके कहर से बचोगे
वक़्त रहते बदल जाओ
रास्ता दोजख का छोडो
आंतक वाद से तौबा कर लो
खुद  जीओ औरों को
जीने दो
04-02-2011


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