192--02-11
एक माँ ने बेटा खोया
सुहाग पत्नी का उजड़ा
परिवार पिता विहीन हुआ
नवजात खिलने से
सुहाग पत्नी का उजड़ा
परिवार पिता विहीन हुआ
नवजात खिलने से
पहले मुरझाया
एक और विस्फोट हुआ
एक और विस्फोट हुआ
कई ज़िन्दगीयों का
अंत हुआ
आंतक वाद ने रंग
आंतक वाद ने रंग
अपना दिखाया
तंग सोच वालों ने
तंग सोच वालों ने
काम अपना किया
इंसानियत को शर्मसार
इंसानियत को शर्मसार
किया
जहन में जहर भरा
जहन में जहर भरा
दुनिया को बताया
क्यों भूल गए जाते
क्यों भूल गए जाते
उनके भी भाई बहन हैं
वो भी किसी के भाई,बाप हैं
कैसा अहसास
कैसा अहसास
उनके अपनों को होता होगा
जब उन का कोई मारा जाता
जब उन का कोई मारा जाता
चेहरा उसका
सामने आता होगा
दिल उनका भी रोता होगा
क्यूं काम ऐसा करते
"निरंतर" नफरत से जीते
खुदा के बनाए उसूलों को
खुदा के नाम पर तोड़ते
उन्हें भी ऊपर जाना होगा
जवाब खुदा को देना होगा
कैसे उसके कहर से बचोगे
वक़्त रहते बदल जाओ
रास्ता दोजख का छोडो
आंतक वाद से तौबा कर लो
खुद जीओ औरों को
जीने दो
04-02-2011
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