Wednesday, September 14, 2011

कल रात फिर सुबह हो गयी

कल रात फिर सुबह
हो गयी
वो सपने में दिख गयी
खिजा में बहार
लौट आयी 
निरंतर उदास चेहरे पर
रौनक आ गयी
हसरतें फिर जाग गयी
दिल की उम्मीदें परवान
चढ़ने लगी 
ठहरी हुयी ज़िन्दगी में
रवानी आ गयी
मंजिल फिर से नज़र
आने लगी
उनकी याद फिर से
सताने लगी
14-09-2011
1506-78-09-11

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