Sunday, March 27, 2011

जब भी याद उनकी आती,उन्हें फ़ोन करता

याद उनकी आती
उन्हें फ़ोन करता
अधिकतर घंटी बजती रहती
किस्मत अच्छी हो
उस दिन फोन उठाती
हाय,हलो करती
बिजी हूँ,कह कर बंद करतीं
रस्म बात करने की निभाती
जिस दिन अकेली होती
खुद फ़ोन करतीं
याद नहीं करने की
शिकायत करतीं
खुद की व्यस्तता के
बहाने गिनाती
याद करते रहना,कह कर
फ़ोन बंद करतीं
निरंतर स्टेपनी की तरह
इस्तेमाल करती
मन करता तो दिल
बहलाने को दो बात करती
मन नहीं करता तो
बिजी हूँ,
कहकर पीछा छुड़ाती
कभी उन्हें कह ना पाता
उनकी आवाज़ से
सुकून मिलता
पर्वत जीतने का
अहसास होता
जितना भी मिलता
दिल से स्वीकार करता
मैं उन्हें दिल से चाहता
वो सिर्फ बात करने की
रस्म निभाते रहें
कुछ तो उनके दिल में
भी होता होगा
उम्मीद में खुशी खुशी
निरंतर सब सहता रहता
27-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
522—192-03-11

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