Friday, March 25, 2011

मैंने राम से पूंछा मैंने क्रष्ण से पूंछा


 मैंने राम से पूंछा
मैंने क्रष्ण से पूंछा
मैंने क्राइस्ट,
और गुरुनानक से पूंछा,
दुआ पैगम्बर से करी
इल्तजा महावीर से करी
मगर जवाब आया नहीं
दुखी हो सोच रहा था
इश्वर से विश्वाश उठ रहा था
तभी आवाज़ मन की आयी
क्या दुआ दिल से करी?
या दिमाग था और कहीं ?
बात समझ में आयी
गलती मालूम हुयी
अब निरंतर दुआ,
अरदास करता हूँ
परमात्मा में खोता हूँ
धीरज रखता हूँ
सुकून से जीता हूँ
25-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
499—169-03-11

No comments: