Friday, March 4, 2011

ये हो नहीं सकता की दिल मेरा अकेला रोता





ये हो नहीं सकता की 
दिल मेरा अकेला रोता
नाम पर मेरे 
उन्हें भी कुछ होता होगा
दिल उनका भी 
कुछ कहता होगा
चैन से कहाँ रहता होगा 
याद तो करता होगा
गम-ऐ-हिज्र 
उन्हें भी होता होगा
ज़माने के डर से
अश्क बहाना मुश्किल होगा
लब्जों से कहना
मुमकिन ना होता होगा
अन्दर ही अन्दर 
रोता होगा
निरंतर दुआ तो करता होगा
मिलने की
उम्मीद रखता तो होगा
प्यार मुझ से
अब भी करता तो होगा
04—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर

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