355—25-03-11
अब चुप्पी तोड़ दो
बात मन की बता दो
हाथ दिल पर रख लो
दो बात खुद से कर लो
कहने में दिक्कत हो
तो लिख कर दे दो
हमेशा चाहा है
चाहता रहूँगा
फैसला जो भी हो ,
खुशी से कबूलूंगा
मतलब
कुछ भी निकालो
पाक रिश्ते को
नाम कुछ भी दो
फर्क नहीं पड़ता
इश्क कभी जहन में
ना था
निरंतर इज्ज़त से
देखा
कुछ तो ऐसा था
दिल से दिल को
जिसने जोड़ा
ज़माना लाख चाहे
कोशिश कोई
कितनी भी कर ले
ये रिश्ता रूहानी है
कभी ना टूटेगा
ख्याल तुम्हारा हमेशा
रहेगा
04—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
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