Monday, March 7, 2011

दिल क्यूं धड़कता,मन क्यूं मचलता


381—51-03-11


दिल
क्यूं धड़कता
मन क्यूं मचलता
क्यों सूरज उगता
फिर अस्त होता
उम्मीद जगाता
उम्मीद मिटाता
निरंतर इंसान
मन और दिल के
चक्कर में फंसता
उम्मीद में हंसता
टूटने पर रोता
सुकून इंसान को
कभी ना मिलता
या तो खुदा मज़ाक
करता
या वजह जीने की
देता
07—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर

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