वो
इंसान कैसा इंसान
जो किसी को
अपना ना समझे
सिर्फ अपनी सोचे
किसी और को ख्याल
ना करे
खुद के आगे
कद्र किसी की ना करे
शब्दों से ठेस पहुंचाए
हरकतों से दिल दुखाए
निरंतर खुद को अहम्
समझे
अपने मकसद को
परम समझे
किसी तरह उस तक पहुंचे
अपने लिए करे
अपने लिए जिए
खुदा को भी ना बख्शे
उस के दिए को भी
खुद का कहे
शिकवा सब से रखे
शिकायत सब की करे
हालात का जिम्मेदार
किसी और को कहे
अकेले जिए अकेले
मर जाए
04—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
1 comment:
वीना ने आपकी पोस्ट " वो इंसान कैसा इंसान,जो किसी को अपना ना समझे " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
वो
इंसान कैसा इंसान
जो किसी को
अपना ना समझे
सिर्फ अपनी सोचे
किसी और को ख्याल
ना करे
खुद के आगे
कद्र किसी की ना करे
बहुत ही अच्छी कविता
बिल्कुल ठीक कहा कि वो इंसान ही कैसा...जो अपने आगे किसी के बारे में न सोचे...
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