आज
उनका आना हुआ
दिल का यादों में खोना हुआ
बीता हर लम्हा याद आने लगा
मन फिर से मचलने लगा
काबू करना मुश्किल होने लगा
कैसे समझाऊँ सोचने लगा
कैसे बताऊँ
किसी और के हो गए
मुट्ठी भर मेरे लिए छोड़ गए
वो ही काफी है,जीने के लिए
निरंतर सूरत
आँखों के सामने आएगी
ज़िन्दगी उसके सहारे ही
कट जाएगी
04—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
No comments:
Post a Comment