Sunday, March 6, 2011

सिद्धांत से जीने वाले को,लौह पुरुष कहते



सदियों पहले
इंसान ने ढूंढा मुझ को
तब से इस्तेमाल मेरा करता
कोई लोहा,
कोई इस्पात कहता
खदानों से निकाला जाता
भट्टी में गलाया जाता
मुझ से बनाए हथोड़े से
मुझे ही पीटा जाता
 सुई से रौकेट तक
काम मुझे लेते
औजार से हथियार तक
मुझ से बनाए जाते
दिल मेरा भी दुखता
जब हथियार जीवित की
जान लेते
रूप कई इंसान ने मेरे बदले
निरंतर मकसद के खातिर
मुझ से खेले
कैसे बताऊँ कितने दुःख
झेले मैंने
फिर भी तसल्ली है मुझको
सिद्धांत से जीने वाले को
लौह पुरुष कहते
06—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर

2 comments:

Dinesh pareek said...

Dinesh pareek ने आपकी पोस्ट " सिद्धांत से जीने वाले को,लोह पुरुष कहते " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

बहुत सुन्दर |

Roshi said...

Roshi ने आपकी पोस्ट " सिद्धांत से जीने वाले को,लोह पुरुष कहते " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

lohe ko kaha se kahan pahucha diya