383—53-03-11
लिख कर बताओ
या कह कर बताओ
चाहो तो इशारे से बताओ
बात मन की बताना ज़रूरी
बात अगर बाहर ना आएगी
निरंतर तुम्हें सताएगी
जो मन को हल्का रखना है
नया जीवन में करना है
तो जो दिल में है बाहर
लाना है
समझने वाले समझ
जायेंगे
ना समझें वो अनाडी
कहलाएंगे
07—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
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