बर्फ का
गोला किसे ना भाता
गोलेवाला
याद किसे ना रहता
स्कूल के बाहर खडा रहता
निरंतर
इंतज़ार छुट्टी का करता
हजूम बच्चों का उसे
घेरता
पहले मुझे,की आवाज़
लगाता
कोई हरा कोई लाल
शरबत डलवाता
चुस्की ले ले उसे चूसता
ठंडक से
सुकून महसूस करता
गोलेवाला
धूप में खडा रहता
खुद पसीने में नाहता
फिर भी गोला
कभी ना चखता
मच्छर मक्खी उडाता
रहता
ज्यादा गर्मी में खुश
होता
खूब बिकेगा मन में
सोचता
छुट्टी में उदास होता
स्कूल खुलने का इंतज़ार
करता
जीवन उसका कभी रंगीन
कभी बदरंग होता
फिर भी
सदा मुस्काराता रहता
08—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
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