Tuesday, March 8, 2011

ट्रैफिक सिपाही उसे कहा जाता


389—59-03-11
 
वो चौराहे पर खडा
रहता
हाथों को हिलाता रहता
मौसम से मतलब ना होता
ठंडी हवाओं से नहीं घबराता
गर्मी में पसीना बहाता
फ़र्ज़ अपना खूब निभाता
आम हो या ख़ास
उसे फर्क ना पड़ता 
लोगों को कभी ना भाता
अवरोध उसे समझा जाता
खड़े खड़े टांगें थके
या फिर चाहे लू लगे
ख्याल उसका
किसी को ना आता
उसके
बिना काम ना चलता
ट्रैफिक
सिपाही उसे कहा जाता
निरंतर
उसे सलाम करता
08—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
  

No comments: