कुछ नहीं
सीखा मैंने खुद से
सब कुछ सीखा लोगों से
कुछ अपनों ने सिखाया
कुछ सीखा परायों से
उम्मीद
जिनसे प्यार की थी
पीठ पर वार किया उन्होंने
डर कर जिनसे रहता था
प्यार मुझे दिया उन्होंने
जिन अनजानों को
जाना मैंने
अपना बनाया मुझे उन्होंने
जो जाने पहचाने थे
अनजान समझा मुझे
उन्होंने
अपने,परायों में उलझा हूँ
दोस्त,दुश्मन में फर्क नहीं
समझता हूँ
दिल जिससे भी मिल
जाता है
उसे अपना समझता हूँ
दूर रहे या पास,
वो मिले या ना मिले
मैं तो उन से मिलता हूँ
ख्यालों में उन्हें रखता हूँ
निरंतर
ख़्वाबों में देखता हूँ
05—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
4 comments:
Sawai Singh Rajpurohit ने आपकी पोस्ट " मैं तो उन से मिलता हूँ,ख्यालों में उन्हें रखता हूँ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
बेहतरीन प्रस्तुति ।
Sunil Kumar ने आपकी पोस्ट " मैं तो उन से मिलता हूँ,ख्यालों में उन्हें रखता हूँ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
मैं तो उन से मिलता हूँ
ख्यालों में उन्हें रखता हूँ
निरंतर
ख़्वाबों में देखता हूँ
सुन्दर अभिव्यक्ति आभार
बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|
Patali-The-Village has left a new comment on your post "मैं तो उन से मिलता हूँ,ख्यालों में उन्हें रखता हूँ...":
बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|
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