हमें भी किया करो
कभी कभी तो मिला करो
हाल-ऐ-दिल सुनाया करो
कभी कभी मुस्कराया करो
कभी कभी रूठा भी करो
कभी नखरे भी दिखाया करो
मनाने पर मान जाया करो
आँखों से आँखें मिलाया करो
दिल को हमारे गुदगुदाया करो
निरंतर ख़्वाबों में हमें देखा करो
कभी अहसास भी कराया करो
ख्यालों में रहते हैं
कभी जुबान से भी बताया करो
05—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
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