अब इसी में खुश हूँ
कुछ वक़्त उनके दिल में
तो रहा
अरमानों को अधूरा मुकाम
तो मिला
उनसे बेहतर किस्मत मेरी
जिन्हें ये अहसास कभी ना मिला
याद करने को खुशनुमा ख्याल
तो मिला
फूल मोहब्बत का सूख गया
खुशबू सूंघने का मौक़ा तो मिला
निरंतर अश्क बहाने का बहाना
तो मिला
दिल किसी और से लगाने का
सबाब तो मिला
वफ़ा दिखाने का इक और मौक़ा
तो मिला
06—03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
5 comments:
परावाणी : Aravind Pandey: ने आपकी पोस्ट " अब इसी में खुश हूँ,कुछ वक़्त उनके दिल में तो रहा " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
बहुत सुन्दर भाई ..
March 6, 2011 10:10 AM
Bhushan said...
अच्छी रचना.
March 6, 2011 5:16 PM
mridula pradhan said...
bhawpurn pangtiyan....ek dard ke saath.....
March 6, 2011 9:58 AM
DR. ANWER JAMAL said...
nice post.
March 6, 2011 10:10 AM
bahut dard bhari panktiyan.... dil ko chu
gayi....
Anita Agarwal
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